वास्तु शास्त्र 03
वास्तु शास्त्र में घर पर शंख रखने पहले जान लें !
पहले जान लें घर पर शंख रखने का इसके नियम, नकारात्मक प्रभावों से रहेंगे दूर:
भारतीय सनातन परंपरा में शंख को अत्यंत पवित्र माना गया है।
वैदिक परंपरा, धार्मिक ग्रंथों तथा वास्तु संबंधी मान्यताओं में शंख का संबंध पवित्रता, शुभता और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है।
श्री विश्वकर्मा पुराण तथा वास्तुशास्त्र की परंपरागत मान्यताओं के अनुसार घर में पूजा - स्थल और धार्मिक वस्तुओं को उचित दिशा एवं नियम से रखना महत्वपूर्ण माना गया है।
घर में शंख रखने से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियम होते हैं, जो घर में सकारात्मक प्रभाव लाते हैं।
आइए जानते हैं कि घर में शंख रखना क्यों आवश्यक है, इसे किस प्रकार रखना चाहिए, और इसके उपयोग से जुड़े नियम क्या हैं।
{ About this item
- Blowing Shankh For Pooja - Conch blowing can provide a great exercise for, urinary tract, bladder, lower abdomen, diaphragm, chest and neck muscles.
- Original Conch Shell - You exercise the rectal muscles in the process of blowing a shankh thus strengthening the rectal muscles and preventing many problems which occur due to the gradual weakening of the rectal muscles.
- Vamavarti Shankh Original - As it also puts pressure on the prostate area, it improves the prostate health and helps prevent prostate enlargement.
- Pooja Shankh - When you blow the conch, your lung muscles are expanded, improving their aerial capacity. Also, perform these yoga asanas for healthy lungs.
- Conch Shell Original - Conch blowing also exercises your thyroid glands and vocal cords and helps in correcting any speech problems. }
कहा जाता है कि शंख समुद्र से उत्पन्न होने के कारण जल तत्व का प्रतीक है और भगवान विष्णु के आयुधों में भी इसका विशेष स्थान है।
पूजा के समय शंखनाद करने की परंपरा वातावरण को पवित्र बनाने और आध्यात्मिक भाव जागृत करने के लिए प्रचलित रही है।
माना जाता है कि घर के वास्तु के अनुरूप नियमों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
हालांकि अक्सर लोग इन बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे घर के वातावरण और परिवार के सदस्यों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
शंख रखने से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियम भी हैं, जो घर में सकारात्मक प्रभाव लाते हैं।
आइए जानते हैं कि घर में शंख रखना क्यों आवश्यक है, इसे किस प्रकार रखना चाहिए, और इसके उपयोग से जुड़े नियम क्या हैं।
घर में शंख कहाँ रखें ?
वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार शंख को पूजा स्थान में स्वच्छ और सम्मानजनक स्थान पर रखना शुभ माना जाता है।
इसे जमीन पर सीधे रखने के बजाय किसी स्वच्छ पूजा - पात्र या चौकी पर रखना चाहिए।
शंख के आसपास गंदगी, जूते - चप्पल अथवा अनावश्यक सामान नहीं होना चाहिए।
शंख रखते समय पूजा स्थान की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
प्रतिदिन पूजा करने वाले परिवार में शंख को श्रद्धापूर्वक साफ करके रखा जा सकता है।
शंख के प्रकार और उनका महत्व :
दक्षिणावर्ती और वामावर्ती शंख :
परंपरा में शंख के विभिन्न प्रकार बताए गए हैं।
दक्षिणावर्ती शंख को विशेष रूप से शुभ और लक्ष्मी से संबंधित माना जाता है, जबकि सामान्य शंख का उपयोग पूजा तथा शंखनाद के लिए किया जाता है।
हालांकि केवल शंख रखने से धन - संपत्ति अपने आप प्राप्त होगी, ऐसा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है।
इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में समझना उचित है।
शंख मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं।
दक्षिणावर्ती शंख:
इसका मुख दाईं ओर खुलता है और इसे लक्ष्मी जी का स्वरूप माना जाता है।
यह पूजा के लिए उपयुक्त होता है।
वामावर्ती शंख:
इसका मुख बाईं ओर खुलता है।
यह दुर्लभ होता है और शिव जी को समर्पित माना जाता है।
इस प्रकार का शंख घर में रखने से पहले किसी विशेषज्ञ या पंडित से परामर्श अवश्य करना चाहिए।
शंख रखने की दिशा और स्थान :
शंख को हमेशा पूजा स्थल या घर की उत्तर - पूर्व दिशा ( ईशान कोण ) में रखा जाना चाहिए।
शंख रखने से पहले उस स्थान को साफ करके पवित्र करें।
इसे कभी भी सीधे जमीन पर न रखें, बल्कि साफ कपड़े या स्टैंड पर रखें।
शंख का मुख ऊपर की ओर होना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो।
+++
+++
शंख से जुड़ी सावधानियाँ :
शंख को केवल सजावट की वस्तु मानकर किसी भी स्थान पर नहीं रखना चाहिए।
पूजा का शंख हो तो उसे स्वच्छ रखना चाहिए।
जिस शंख से जल या पूजा की जाती है, उसका उपयोग श्रद्धा और धार्मिक परंपरा के अनुसार ही करना चाहिए।
कुछ परिवारों में शंख में जल भरकर रखने और उससे पूजा करने की परंपरा है।
वहीं कुछ परंपराओं में पूजा में प्रयुक्त शंख और शंखनाद वाले शंख को अलग रखने की सलाह दी जाती है।
इस लिए अपने परिवार की धार्मिक परंपरा और गुरुजन की मान्यता का सम्मान करना बेहतर है।
शंख बजाने के विशेष नियम:
पूजा में उपयोग किए जाने वाले शंख को बजाने से बचना चाहिए।
घर में दो अलग - अलग शंख रखे जा सकते हैं—
एक पूजा के लिए और दूसरा बजाने के लिए।
पूजा के दौरान शंख में गंगाजल या पानी भरकर भगवान का अभिषेक करें।
शंख बजाने के लिए सुबह और शाम का समय उपयुक्त माना गया है।
शंखनाद का महत्व :
प्राचीन भारतीय परंपरा में पूजा के आरंभ और समापन पर शंखनाद किया जाता रहा है।
धार्मिक दृष्टि से इसे मंगलकारी माना जाता है।
शंख की ध्वनि वातावरण में आध्यात्मिक भाव उत्पन्न करती है और पूजा करने वाले व्यक्ति का ध्यान ईश्वर की ओर केंद्रित करने में सहायता करती है।
शंख रखने के लाभ :
वास्तु दोष निवारण: शंख को उत्तर - पूर्व दिशा में रखने से वास्तु दोष समाप्त होते हैं।
धन और समृद्धि: इसे लक्ष्मी जी का प्रतीक मानते हुए पूजा स्थल पर रखने से धन - धान्य की वृद्धि होती है।
सकारात्मक ऊर्जा: शंख बजाने और उसमें भरे जल के छिड़काव से घर का वातावरण शुद्ध होता है।
स्वास्थ्य लाभ: आयुर्वेद के अनुसार, शंख का जल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है।
मानसिक शांति: शंख की ध्वनि तनाव कम करती है और मानसिक शांति प्रदान करती है।
शंख को सही तरीके से उपयोग में लाकर घर में शुभ ऊर्जा और समृद्धि का संचार किया जा सकता है।
संदेश :
वास्तुशास्त्र का मूल उद्देश्य घर को स्वच्छ, व्यवस्थित और संतुलित रखना है।
इस लिए घर में शंख रखते समय केवल दिशा देखने के बजाय स्वच्छता, श्रद्धा, उचित स्थान और नियमित पूजा को प्राथमिकता देना चाहिए।
अंततः शंख को सनातन परंपरा में भगवान विष्णु, पवित्रता और मंगल का प्रतीक माना गया है।
श्रद्धापूर्वक रखा गया शंख घर में आध्यात्मिक वातावरण और धार्मिक भाव को बढ़ाने का सुंदर माध्यम बन सकता है।
वास्तु संबंधी मान्यताओं को परंपरागत आस्था के रूप में समझना चाहिए, न कि निश्चित वैज्ञानिक परिणाम के रूप में।
!!!!! शुभमस्तु !!!
No comments:
Post a Comment