वैदिक वास्तु शास्त्र 9
शुभ प्रसंग में और घर में कलावा कहा किस दिन बांधना चाहिए।
शुभ प्रसंग में और घर में कलावा कहा किस दिन बांधना चाहिए।
घर में कलावा/मौली कहाँ और किस दिन बाँधना चाहिए?
शुभ प्रसंग, गृह-सुख, समृद्धि, रक्षा और मंगल के लिए धार्मिक परंपरा, ज्योतिष एवं वास्तु-विचार
शुभ पसंग में और घर की इन जगहों पर बांध दें कलावा, नौकरी से लेकर ग्रह क्लेश तक में मिलेगाा फायदा।
सनातन धर्म की पूजा-पद्धति में कलावा, मौली या रक्षा-सूत्र का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पूजा, संकल्प, यज्ञ, व्रत, देवपूजन, गृहप्रवेश, भूमि-पूजन और अन्य मांगलिक अवसरों पर इसे धारण करने की परंपरा अनेक क्षेत्रों में प्रचलित है।
कलावे को हिंदू धर्म में रक्षा सूत्र के नाम से भी जाना जाता है।
कलावा केवल लाल धागा नहीं है। धार्मिक आचार में यह संकल्प, मंगल, रक्षा और देव-स्मरण का प्रतीक माना जाता है। जब कोई व्यक्ति पूजा या धार्मिक अनुष्ठान में कलावा बाँधता है, तो उसका भाव यह होता है कि वह अपने संकल्प को ईश्वर के समक्ष स्वीकार करता है और धर्ममय आचरण का पालन करने का प्रयास करेगा।
इसी प्रकार घर में भी कलावा बाँधने की कुछ लोक-परंपराएँ मिलती हैं। लेकिन यहाँ शास्त्रीय सत्य को समझना आवश्यक है कि हर स्थान पर कलावा बाँधने से निश्चित रूप से धन आएगा या किसी ग्रह का दोष समाप्त हो जाएगा, ऐसा सार्वभौमिक वैदिक सिद्धांत नहीं है।
अतः कलावा को सबसे पहले धार्मिक मंगल-सूचक रक्षा-सूत्र के रूप में समझना चाहिए।
किसी प्रकार के पूजा - पाठ या धार्मिक अनुष्ठान में हाथ में कलावा जरूर बांधा जाता है और यह माना जाता है कि इससे उस कार्य की पवित्रता बनी रहती है।
आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि हाथ के अलावा घर के और किन स्थानों पर कलावा बांधना शुभ होता है।
अगर कलावे से संबंधित कुछ नियमों का ध्यान रखा जाए, तो इससे व्यक्ति को कई तरह के अच्छे परिणाम मिलने लगते हैं।
🌺 कलावा क्या है?
कलावा को संस्कृत परंपरा में मौली या रक्षा-सूत्र कहा जाता है। पूजा के समय आचार्य द्वारा रक्षा-सूत्र बाँधने की परंपरा अनेक हिंदू संस्कारों में दिखाई देती है।
इसका उद्देश्य केवल बाहरी सजावट नहीं, बल्कि धार्मिक संकल्प और शुभता का स्मरण है।
कलावा बाँधते समय मन में यह भाव रखा जा सकता है—
“मैं अपने कर्म, वचन और विचार को शुभ, सत्य तथा धर्ममय रखने का संकल्प करता हूँ।”
इस दृष्टि से कलावा का सबसे बड़ा प्रभाव मानसिक और आध्यात्मिक है।
न केवल हाथ पर, बल्कि ( kalawa bandhne ke Niyam ) घर के इन स्थानों पर भी कलावा बांधने के आपको अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
दूर होंगी सभी समस्याएं :
तुलसी को हिंदू धर्म में काफी महत्व दिया जाता है।
🕉️ कलावा कहाँ बाँधना चाहिए?
यदि धार्मिक पूजा या अनुष्ठान हो रहा हो तो कलावा सामान्यतः व्यक्ति की कलाई पर बाँधा जाता है। विभिन्न संप्रदायों और क्षेत्रों में पुरुषों और महिलाओं के लिए कलाई संबंधी परंपराओं में अंतर मिल सकता है।
इसलिए किसी एक पद्धति को सभी परिवारों के लिए अनिवार्य नियम नहीं कहना चाहिए।
घर के संबंध में
यदि घर में कलावा किसी धार्मिक भावना से लगाया जाता है तो उसे—
- पूजा स्थान में,
- कलश या पूजा-संकल्प से संबंधित वस्तु पर,
- शुभ धार्मिक आयोजन में उपयोग होने वाली सामग्री पर
परंपरा के अनुसार रखा या बाँधा जा सकता है।
लेकिन मुख्य द्वार, तिजोरी, अलमारी, रसोई, पेड़, पानी की टंकी आदि प्रत्येक स्थान पर कलावा बाँधना वैदिक अनिवार्यता नहीं है।
साथ ही तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का भी वास माना गया है।
ऐसे में यदि आप तुलसी के पौधे में कलावा बांधते हैं, तो इससे आपको धन की देवी का आशीर्वाद तो मिलता ही है, साथ ही घर - परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बढ़ता है।
घर के इन स्थानों पर बांधें कलावा :
घर के मंदिर में भी कलावा जरूर बांधना चाहिए।
ऐसा करने से घर - परिवार में सुख - समृद्धि का वास बना रहता है।
इसी के साथ आप रसोई में खिड़की या फिक पानी के मटके पर भी कलावा बांध सकते हैं।
ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा की कृपा सदा आपके ऊपर बनी रहती है।
🪔 गृहप्रवेश में कलावा
गृहप्रवेश एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है। उस समय गणेशपूजन, वास्तुपूजन, कलशस्थापन, अग्निहोत्र या हवन तथा अन्य धार्मिक विधियाँ परंपरा के अनुसार की जाती हैं।
ऐसे शुभ अवसर पर कलावा बाँधा जाना मंगल-संकल्प का हिस्सा हो सकता है।
भाव
नए घर में प्रवेश करते समय कलावा यह स्मरण कराता है कि—
नया गृह केवल संपत्ति नहीं, बल्कि धर्म, सदाचार, परिवार और जिम्मेदारी का स्थान है।
यही इसका वास्तविक धार्मिक महत्व है।
कलावा बांधने से मिलेगा धन लाभ:
पूजा में इस्तेमाल किए गए कलावे को आप घर की तिजोरी में रख सकते हैं।
ऐसा करने से आपको धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।
वैदिक वास्तु वास्तु शास्त्र के अनुसार आपको अपनी तिजोरी घर की दक्षिण या दक्षिण - पश्चिम दिशा में रखनी चाहिए।
इस दिशा में तिजोरी को इस प्रकार रखें कि उसका मुख उत्तर दिशा या उत्तर - पूर्व दिशा में खुले।
तभी आपको तिजोरी में कलावा रखने का अधिक लाभ मिल सकता है।
🌿 भूमि-पूजन के समय कलावा
भूमि-पूजन में भूमि के प्रति सम्मान और निर्माण के शुभ आरंभ का संकल्प किया जाता है।
कलश, पूजन-सामग्री और संकल्प-विधि के साथ रक्षा-सूत्र का उपयोग कुछ धार्मिक परंपराओं में किया जाता है।
यहाँ कलावा को “धन खींचने वाला साधन” मानने के बजाय शुभ कार्य की रक्षा और संकल्प का प्रतीक समझना अधिक शास्त्रीय दृष्टि है।
इन पौधे या पेड़ों में बांधें कलावा:
अगर आपके घर के आसपास पीपल, शमी या बरगद का पड़े है, तो आप इनमें भी कलावा बांध सकते हैं।
शमी के पेड़ में कलावा बांधने से शनि का बुरा प्रभाव कम होता है।
वहीं पीपल के पेड़ में कलावा बांधने से साधक को देवी - देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।
भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए आप बरगद के पेड़ में भी कलावा बांध सकते हैं।
इन 3 राशी के लोगों को कलावा खुद को और शिव जी को बांधकर ही जरूर करनी चाहिए भगवान शिव की पूजा, नहीं तो बिगड़ जाते हैं बनते काम।
वैदिक वास्तु शास्त्र और वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तो मानें तो शनि की बाधा के चलते जातक को जीवन में नाना प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
🌸 विवाह, यज्ञ और अन्य शुभ प्रसंग
कलावा का प्रयोग केवल गृहप्रवेश तक सीमित नहीं है।
विभिन्न धार्मिक संस्कारों और अनुष्ठानों में रक्षा-सूत्र बाँधने की परंपरा मिलती है।
जैसे—
विवाह-संस्कार, यज्ञ, व्रत-संकल्प, देवपूजन, धार्मिक अनुष्ठान और मांगलिक कार्य।
इन अवसरों पर कलावा शुभ संकल्प का प्रतीक होता है।
📅 किस दिन कलावा बाँधना चाहिए?
यह प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है।
यदि किसी धार्मिक अनुष्ठान में आचार्य या परिवार की परंपरा के अनुसार कलावा बाँधा जा रहा है, तो उसी पूजा या संकल्प के समय बाँधना सर्वोत्तम माना जा सकता है।
केवल “मंगलवार को ही कलावा बाँधना चाहिए”, “गुरुवार को ही घर में बाँधना चाहिए” या “शनिवार को बाँधने से धन की वृद्धि होगी”—ऐसा सार्वभौमिक वैदिक नियम नहीं है।
अर्थात दिन का चुनाव अनुष्ठान और धार्मिक अवसर के अनुसार होना अधिक उचित है।
आर्थिक स्थिति विषम हो जाती है।
व्यक्ति लाख चाहकर जीवन में सफल नहीं हो पाता है।
इसके लिए वैदिक ज्योतिष शास्त्र तो जरूर भगवान शिव की पूजन करने से पहले शिव को कलावा का बंधन कर दो उसके बाद खुद भी भगवान शिव के सामने ही खुद के हाथ पर कलावा बंधन जरूर कर ले ( Lord Shiva Favorite zodiac signs ) की पूजा करने की सलाह देते हैं।
भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।
सोमवार का दिन भगवान शिव को प्रिय है।
सोमवार के दिन महादेव का रुद्राभिषेक किया जाता है।
भगवान शिव की पूजा करने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
सनातन धर्म में सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित होता है।
इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है।
साथ ही सोमवार का व्रत रखा जाता है।
इस व्रत को करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
वैदिक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार तो अविवाहित जातकों को शीघ्र विवाह के लिए भगवान शिव की पूजा करने की सलाह देते हैं।
वहीं, विवाहित महिलाएं सुख और सौभाग्य में वृद्धि एवं पति की लंबी आयु के लिए सोमवार के दिन व्रत रख भगवान शिव की पूजा करती हैं।
लेकिन क्या आपको पता है कि कई राशि के जातकों को भगवान शिव की अवश्य ही पूजा करनी चाहिए।
अनदेखी करने से बने काम भी बिगड़ जाते हैं। आइए, इन राशियों के बारे में जानते हैं-
कर्क राशि :
कर्क राशि के जातकों को भगवान शिव की नियमित रूप से पूजा करनी चाहिए।
वहीं, सोमवार के दिन महादेव की विशेष पूजा करनी चाहिए।
इस राशि के जातकों के आराध्य भगवान शिव हैं।
अतः हर सोमवार के दिन कर्क राशि के जातक स्नान-ध्यान कर सफेद वस्त्र पहनें।
अब आचमन कर अपने आप को पवित्र करें।
इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें।
तदोउपरांत, गंगाजल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें।
आप चाहे तो गाय के कच्चे दूध से भी अभिषेक कर सकते हैं।
इसके बाद शिवजी को भांग और धतूरे के पत्ते और फूल अर्पित करें।
पूजा के समय शिव चालीसा का पाठ करें।
शिव मंत्र का जप करें।
अंत में आरती कर सुख और सौभाग्य में वृद्धि की कामना करें।
कुंभ और मकर :
मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनिदेव हैं और आराध्य देवों के देव महादेव हैं।
इस राशि के जातकों पर शनिदेव की कृपा बरसती है।
हालांकि, काम की अधिकता के चलते मकर और कुंभ राशि के जातक नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा नहीं कर पाते हैं।
अगर आप भी ऐसी अनदेखी करते हैं, तो इसमें बदलाव करें।
शनिदेव की कृपा पाने के लिए नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करें।
महादेव का अभिषेक करें।
भगवान शिव जलाभिषेक से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
अतः रोजाना सुविधा अनुसार अभिषेक करें।
गंगाजल, कच्चे दूध, पंचामृत और घी से भगवान शिव का अभिषेक करें।
भगवान शिव की पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
एक बार शनिदेव की कृपा बरस जाने पर जातक अपने जीवन में अवश्य ही अमीर बनता है।
🌞 रविवार
रविवार सूर्य से संबंधित दिन माना जाता है। सूर्योपासना, आदित्य-पूजन आदि के लिए यह दिन विशेष माना जाता है।
यदि रविवार को सूर्य-पूजन या कोई धार्मिक संकल्प किया जा रहा हो तो उस पूजा-विधि में रक्षा-सूत्र का उपयोग परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
लेकिन केवल रविवार को कलावा बाँधने से आर्थिक समस्या निश्चित रूप से समाप्त होगी, ऐसा दावा शास्त्रीय रूप से नहीं किया जाना चाहिए।
🌙 सोमवार
सोमवार शिव-पूजन के लिए प्रसिद्ध है।
यदि सोमवार को शिवपूजन, व्रत या कोई संकल्प किया जाए तो पूजा-विधि के अंतर्गत कलावा बाँधा जा सकता है।
इसका उद्देश्य भगवान शिव की कृपा के लिए किया गया धार्मिक संकल्प और मंगल-भाव है।
🔥 मंगलवार
मंगलवार को हनुमानजी और मंगल ग्रह से संबंधित धार्मिक उपासना की परंपरा है।
यदि हनुमानजी का पूजन या कोई धार्मिक अनुष्ठान किया जा रहा हो तो कलावा रक्षा-संकल्प के रूप में बाँधा जा सकता है।
लेकिन लाल कलावा बाँधते ही मंगल ग्रह की सभी समस्याएँ समाप्त हो जाएँगी—ऐसा निश्चित फलादेश उचित नहीं।
🌿 बुधवार
बुधवार को बुध ग्रह से संबंधित धार्मिक परंपराएँ हैं।
यदि गणेश अथवा बुध संबंधी पूजा-संकल्प किया जा रहा हो तो रक्षा-सूत्र का उपयोग किया जा सकता है।
यहाँ भी मुख्य बात पूजा और संकल्प है, केवल वार नहीं।
🪔 गुरुवार
गुरुवार को गुरु, देवपूजन और बृहस्पति संबंधी धार्मिक आचार की परंपरा है।
यदि गुरु-पूजन, विष्णु-पूजन या कोई धार्मिक अनुष्ठान किया जा रहा हो तो कलावा बाँधना शुभ-संकल्प का भाग हो सकता है।
परंतु “गुरुवार को घर की तिजोरी पर कलावा बाँधने से धन निश्चित रूप से बढ़ता है”—इसे मूल वैदिक नियम नहीं कहा जा सकता।
🌸 शुक्रवार
शुक्रवार को लक्ष्मी-पूजन की परंपरा अनेक परिवारों में है।
यदि लक्ष्मीपूजन या गृह-समृद्धि के लिए धार्मिक पूजा की जाए तो पूजा के संकल्प में रक्षा-सूत्र का प्रयोग किया जा सकता है।
यहाँ वास्तविक समृद्धि का अर्थ केवल धन नहीं, बल्कि अन्न, सुख, शांति, स्वास्थ्य और सद्भाव भी है।
🪐 शनिवार
शनिवार शनि-उपासना के लिए प्रसिद्ध है।
यदि शनि संबंधी धार्मिक अनुष्ठान किया जाए तो रक्षा-सूत्र की परंपरा स्थानीय और पारिवारिक विधि के अनुसार हो सकती है।
लेकिन किसी ग्रह को प्रसन्न करने के लिए बिना कुंडली देखे विशेष रंग का धागा बाँधना अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए।
⭐ जन्मकुंडली और कलावा
जन्मकुंडली के आधार पर व्यक्ति की ग्रहगत स्थिति का ज्योतिषीय अध्ययन किया जाता है।
यदि किसी व्यक्ति के जीवन में धन, गृह-सुख या मानसिक अशांति का प्रश्न हो तो परंपरागत ज्योतिष में—
चतुर्थ भाव — गृह एवं सुख
द्वितीय भाव — धन एवं परिवार
एकादश भाव — लाभ
नवम भाव — भाग्य
दशम भाव — कर्म
आदि का विचार किया जाता है।
दशा-अंतरदशा और गोचर से समय का विचार किया जाता है।
इसके बाद यदि धार्मिक उपाय आवश्यक समझा जाए तो संबंधित देवता की पूजा, मंत्र-जप, दान, सेवा या रक्षा-सूत्र जैसे आचार अपनी परंपरा के अनुसार किए जा सकते हैं।
अर्थात कलावा ज्योतिषीय निदान का विकल्प नहीं है।
🌙 प्रश्नकुंडली और कलावा
यदि प्रश्न हो—
“घर में बार-बार अशांति क्यों हो रही है और कौन-सा धार्मिक उपाय किया जाए?”
तो प्रश्नकुंडली की परंपरा में प्रश्नकालीन ग्रहों का अध्ययन किया जा सकता है।
यदि धार्मिक उपाय उपयुक्त हो तो पूजा, जप, दान, देव-स्मरण और रक्षा-सूत्र आदि सुझाए जा सकते हैं।
लेकिन प्रश्नकुंडली देखकर किसी विशेष स्थान पर कलावा बाँधना ही अनिवार्य उपाय है—ऐसा सार्वभौमिक नियम नहीं है।
⭐ नक्षत्र-पद्धति और शुभ समय
नक्षत्र-पद्धति में शुभ कार्य के लिए नक्षत्र, तिथि, वार, योग, करण और लग्न आदि का विचार किया जाता है।
यदि गृहप्रवेश, भूमि-पूजन या कोई बड़ा धार्मिक अनुष्ठान हो तो शुभ मुहूर्त चुना जा सकता है।
उस अनुष्ठान में कलावा बाँधा जाए तो वह मुहूर्त के धार्मिक संकल्प का हिस्सा बन सकता है।
🔢 अंकशास्त्र का विचार
अंकशास्त्र में तिथि, नाम और संख्या के आधार पर विभिन्न पारंपरिक निष्कर्ष निकाले जाते हैं।
यदि किसी घर की संख्या या व्यक्ति की जन्मतिथि के आधार पर कोई धार्मिक उपाय सुझाया जाए, तो कलावा को केवल सहायक धार्मिक प्रतीक के रूप में रखना उचित है।
कलावा का रंग बदलकर किसी अंक का दोष निश्चित रूप से समाप्त हो जाता है—ऐसा प्रमाणित सार्वभौमिक शास्त्रीय नियम नहीं है।
✋ हस्तरेखा और सामुद्रिकशास्त्र
हस्तरेखा और सामुद्रिकशास्त्र व्यक्ति के स्वभाव तथा जीवन के पारंपरिक संकेतों का अध्ययन करते हैं।
इनसे प्राप्त संकेतों के आधार पर व्यक्ति की धार्मिक प्रवृत्ति या साधना के विषय में सलाह दी जा सकती है, लेकिन घर में कलावा कहाँ बाँधना है इसका निर्णय केवल हाथ की रेखाओं से करना उचित नहीं।
🏡 घर में कलावा बाँधने की पाँच सावधानियाँ
१. कलावा को गंदे स्थान पर न बाँधें
यदि धार्मिक प्रतीक के रूप में रखा गया है तो स्थान स्वच्छ होना चाहिए।
२. पुराने और टूटे हुए कलावे को अनिश्चित समय तक न रखें
कलावा पुराना होकर टूट जाए तो उसे सम्मानपूर्वक हटाने की पारिवारिक/धार्मिक परंपरा का पालन करें।
३. कलावा को ताबीज समझकर हर समस्या का समाधान न मानें
धन की समस्या हो तो आय-व्यय, व्यवसाय और कर्म का भी विचार आवश्यक है।
४. गैस, विद्युत उपकरण या पानी की पाइप पर कलावा न बाँधें
धार्मिक प्रतीक से अधिक महत्वपूर्ण सुरक्षा है।
५. पूजा स्थान को स्वच्छ रखें
कलावा श्रद्धा का प्रतीक है; इसलिए उसके साथ स्वच्छता और सम्मान का भाव होना चाहिए।
🌾 घर की सुख-समृद्धि के लिए कलावा का सही भाव
यदि घर में कलावा लगाया या पूजा में बाँधा जाए तो उसके साथ निम्न भाव रखना अधिक महत्वपूर्ण है—
“हे ईश्वर! इस गृह में धर्म, अन्न, स्वास्थ्य, शांति, सद्बुद्धि और सदाचार बना रहे। परिवार के सभी सदस्य अपने कर्म में ईमानदार रहें और प्राप्त धन का उचित उपयोग करें।”
यह संकल्प कलावा के धार्मिक अर्थ को अधिक सार्थक बनाता है।
🪔 क्या कलावा बाँधने से धन बढ़ता है?
इस प्रश्न का उत्तर शास्त्रीय सावधानी के साथ देना चाहिए।
कलावा स्वयं कोई धन-उत्पादक यंत्र नहीं है।
धन की स्थिति के लिए ज्योतिषीय परंपरा में कुंडली के धन और लाभ भावों का विचार किया जाता है। वास्तु में भवन की संरचना, दिशा, प्रकाश, वायु, जल और उपयोगिता का अध्ययन किया जाता है।
वास्तविक जीवन में धन के लिए—
परिश्रम + सही निर्णय + व्यवसाय/नौकरी + बचत + आर्थिक अनुशासन + अवसर का उचित उपयोग
आवश्यक हैं।
कलावा इन सबके स्थान पर नहीं आ सकता।
🌺 पाँच शुभ अवसर जहाँ कलावा सार्थक है
१. गृहप्रवेश — नए गृह में मंगल-संकल्प।
२. भूमि-पूजन — निर्माण के शुभ आरंभ का संकल्प।
३. देवपूजन — पूजा और रक्षा-संकल्प।
४. यज्ञ/हवन — धार्मिक अनुष्ठान का अंग।
५. विवाह एवं संस्कार — मांगलिक धार्मिक विधि का हिस्सा।
इन अवसरों पर कलावा का महत्व केवल धागे में नहीं, बल्कि संकल्प और श्रद्धा में है।
🙏 अंतिम शास्त्रीय निष्कर्ष
कलावा या मौली सनातन धार्मिक परंपरा में रक्षा-सूत्र, मंगल और संकल्प का प्रतीक है। इसे सबसे अधिक उचित रूप से पूजा, संकल्प, यज्ञ, गृहप्रवेश, भूमि-पूजन और अन्य मांगलिक अवसरों में धार्मिक विधि के अनुसार धारण किया जाना चाहिए।
घर में इसे रखने या बाँधने की लोक-वास्तु परंपराएँ अलग-अलग क्षेत्रों में मिलती हैं, लेकिन प्रत्येक स्थान और प्रत्येक वार के लिए एक ही निश्चित वैदिक नियम बताना उचित नहीं।
जन्मकुंडली में धन, गृह और भाग्य का ज्योतिषीय विचार अलग विषय है। प्रश्नकुंडली तत्काल प्रश्न के संकेत देती है। गोचर समयगत स्थिति बताता है। नक्षत्र-पद्धति शुभ मुहूर्त के विचार में सहायक है। अंकशास्त्र, हस्तरेखा और सामुद्रिकशास्त्र अपनी-अपनी परंपराओं में संकेत देते हैं। वास्तु भवन की दिशा और संरचना का अध्ययन करता है।
इन सबका सार यही है—
कलावा श्रद्धा का प्रतीक है,
वास्तु गृह-विन्यास का विषय है,
ज्योतिष समय और ग्रहों के संकेतों का अध्ययन है,
और सुख-समृद्धि के लिए कर्म, सदाचार तथा विवेक अनिवार्य हैं।
अतः घर में कलावा बाँधते समय सबसे श्रेष्ठ नियम है—
“स्थान स्वच्छ हो, अवसर शुभ हो, विधि धार्मिक हो, संकल्प सात्त्विक हो और मन में ईश्वर के प्रति श्रद्धा हो।”
यही कलावा की वास्तविक मंगलमय भावना है।
॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥ श्री वास्तुपुरुषाय नमः ॥ ॥ श्री महालक्ष्म्यै नमः ॥ ॥ श्री विष्णवे नमः ॥ ॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः ॥ !!!!! शुभमस्तु !!!
🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏
पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
" Opp. Shri Ramanatha Swami Kovil Car Parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits, V.O.C. Nagar , RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद..
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏