घर में सुख शांति और धन की कमी दूर कैसे हो ?
घर में सुख-शांति और धन की कमी दूर करने के वास्तु नियम
घर में सुख शांति और धन की कमी दूर कैसे हो ?
घर की सुख - समृद्धि और खुशहाली के लिए कई विशेष उपाय बताए गए हैं।
मान्यता है कि इन उपायों को अपना कर घर की पॉजिटिविटी को बढ़ाया जा सकता है।
जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, गोचर, नक्षत्र-पद्धति, ज्योतिष और वास्तु परंपरा के अनुसार प्रभाव, महत्व, फल एवं उपाय
क्या आपकी रसोई की दिशा में हो रही है आपकी तरक्की ?
भारतीय सनातन परंपरा में गृह को मनुष्य के जीवन का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। घर में केवल धन का होना ही समृद्धि नहीं है। जहाँ अन्न उपलब्ध हो, परिवार में परस्पर प्रेम हो, स्वास्थ्य और मानसिक शांति हो, घर व्यवस्थित हो, आय का उचित साधन हो और प्राप्त धन का सदुपयोग हो—वही गृह वास्तविक अर्थ में समृद्ध माना जा सकता है।
वास्तुशास्त्र की परंपरा में भूमि, दिशा, द्वार, पंचमहाभूत, प्रकाश, वायु, जल, अग्नि, भार-विन्यास और गृह के विभिन्न भागों का विचार किया जाता है। वैदिक ज्योतिषीय परंपरा में धन और गृह-सुख के लिए जन्मकुंडली के विभिन्न भावों तथा ग्रहों का अध्ययन किया जाता है।
नक्षत्र-पद्धति और कृष्णमूर्ति पद्धति में ग्रह, नक्षत्र और भाव-संबंधों के आधार पर फलित के अलग-अलग तरीके हैं। अंकशास्त्र, हस्तरेखा और सामुद्रिकशास्त्र की अपनी स्वतंत्र परंपराएँ हैं।
इसलिए इन सभी को मिलाकर समझने का उचित तरीका यह है कि ज्योतिष व्यक्ति और समय का संकेत दे, जबकि वास्तु भवन की वास्तविक व्यवस्था का अध्ययन करे।
वैदिक वास्तु शास्त्र विद्या के अनुसार, रसोई की दिशा और सजावट घर में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा ला सकती है. दक्षिण-पश्चिम दिशा में रसोई नहीं बनानी चाहिए. चूल्हा दक्षिण-पूर्व दिशा में और सिंक उत्तर दिशा में होना चाहिए. सही दिशा और सजावट से घर में स्वास्थ्य और सुख बढ़ता है।
हमारे घर में हर कोना किसी न किसी तरीके से हमारी लाइफ को प्रभावित करता है. खासकर रसोई, जिसे घर का दिल माना जाता है. क्या आप जानते हैं कि रसोई की दिशा और सजावट में छोटी - सी गड़बड़ी भी आपके जीवन में नकारात्मक ऊर्जा ( negative energy ) ला सकती है?
तो क्यों न हम फेंगशुई के कुछ आसान और असरदार टिप्स अपनाएं, जिससे आपका रसोई ना सिर्फ आकर्षक बनेगा, बल्कि आप घर में समृद्धि आ सकती है, तो आइए, जानते हैं वैदिक वास्तु शास्त्र विद्या के कुछ बेहतरीन टिप्स जो आपकी रसोई को और भी खास बना सकते हैं।
🌸 धन की कमी का पहला वास्तु-सूत्र — घर की अव्यवस्था दूर करें
कई बार आर्थिक कठिनाई को केवल ग्रह या वास्तु-दोष से जोड़ दिया जाता है, जबकि घर की अव्यवस्था स्वयं आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
घर में अनावश्यक सामान जमा होने से—
- उपयोगी वस्तुएँ खो जाती हैं,
- वस्तुएँ दोबारा खरीदनी पड़ती हैं,
- सफाई का खर्च बढ़ता है,
- स्थान कम होता है,
- और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
वास्तु-परंपरा में भी स्वच्छता और सुव्यवस्था को महत्वपूर्ण माना गया है।
उपाय
घर से अनुपयोगी वस्तुएँ हटाएँ। मुख्य प्रवेश, पूजा स्थान, रसोई और घर के मध्य भाग को साफ रखें।
रसोई को बनाएं पॉजिटिव और हेल्दी
इस दिशा में न बनवाएं रसोई घर:
क्या आपने कभी सोचा है कि रसोई की दिशा भी हमारी जिंदगी में कितना बड़ा फर्क डाल सकती है. फेंगशुई के अनुसार, दक्षिण - पश्चिम दिशा में रसोई बनवाना सही नहीं होता. ये दिशा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है. सबसे सही दिशा है दक्षिण - पूर्व या पूर्व, जो अग्नि तत्व से जुड़ी हुई है. बता दें कि ऐसी मान्यता है कि इन दिशाओं में रसोई होने से घर की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है.
रसोई घर का दरवाजा: कभी भी रसोई का दरवाजा मुख्य द्वार के सामने नहीं होना चाहिए. अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो ये घर में दरिद्रता का कारण हो सकता है. दरवाजे का रंग पीला या नारंगी होना शुभ माना जाता है. इन रंगों से धन और समृद्धि आकर्षित होती है, तो अगली बार जब रसोई का दरवाजा डिजाइन करें, तो इन बातों का ध्यान रखें.।
चूल्हे की दिशा:
रसोई में चूल्हे की दिशा का भी बहुत महत्व है.
वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, चूल्हा हमेशा दक्षिण - पूर्व दिशा में होना चाहिए. यह दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी हुई है और चूल्हा आग का प्रतीक है. ध्यान रखें कि चूल्हा और सिंक एक - दूसरे के सामने न हों क्योंकि इससे घर में कलह की संभावना बढ़ सकती है।
सिंक की दिशा:
सिंक को हमेशा उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है. दक्षिण दिशा में सिंक रखना सही नहीं होता, क्योंकि ये अग्नि और जल का संयोजन बनाता है, जो वैदिक वास्तु शास्त्र में शुभ नहीं माना जाता.।
वास्तु शास्त्र विद्या के अनुसार तो घर की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए कई विशेष उपाय बताए गए हैं।
इस के साथ ही घर की आर्थिक स्थिति को मजूबत बनाने और सुख - समृद्धि के लिए भी वैदिक वास्तु शास्त्र विद्या के कुछ उपाय कारगर माने गए हैं।
मान्यता है कि वैदिक वास्तु शास्त्र विद्या के इन उपायों से घर में बरकत आती है।
कार्यों की बाधाएं दूर होती है।
धन आगमन के नए मार्ग प्रशस्त होते हैं और जीवन में खुशियों का आगमन होता है।
ऐसे में आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए आप भी वैदिक वास्तु शास्त्र विद्या के कुछ आसान उपायों को फॉलो कर सकते हैं।
🔥 आग्नेय कोण — अग्नि और रसोई
दक्षिण-पूर्व दिशा को आग्नेय कोण और अग्नि तत्व से संबंधित माना जाता है।
रसोई के लिए आग्नेय दिशा को प्राथमिकता देने की वास्तु-परंपरा है।
नियम
चूल्हा, सिंक, विद्युत उपकरण और गैस व्यवस्था सुरक्षित ढंग से रखें।
विशेष सावधानी
चूल्हे और सिंक को बिल्कुल सटाकर रखने से बचें, यदि भवन की संरचना में उचित व्यवस्था संभव हो।
फल
व्यवस्थित रसोई का सीधा संबंध अन्न, स्वास्थ्य और गृहस्थ व्यवस्था से है।
🌞 पूर्व दिशा — प्रकाश और जागृति
पूर्व दिशा सूर्य के उदय की दिशा है। वास्तु परंपरा में इसे प्रकाश और आरंभ से संबंधित माना जाता है।
घर में सुबह का प्राकृतिक प्रकाश आने देना एक शुभ और व्यावहारिक व्यवस्था है।
नियम
पूर्व दिशा को अनावश्यक रूप से भारी और बंद न रखें। खिड़कियाँ स्वच्छ रखें।
प्रभाव
प्राकृतिक प्रकाश घर को अधिक उज्ज्वल बनाता है। वास्तु परंपरा में इसे सकारात्मक वातावरण से जोड़ा जाता है।
उपाय
प्रातः खिड़कियाँ खोलें और जहाँ संभव हो सूर्य का प्रकाश घर में आने दें। श्रद्धा हो तो सूर्योपासना की जा सकती है।
💰 उत्तर दिशा — धन और व्यवस्था
वास्तु की लोकप्रिय परंपरा में उत्तर दिशा को आर्थिक गतिविधियों और धन से जोड़ा जाता है।
लेकिन केवल उत्तर दिशा खुली कर देने से धन की निश्चित प्राप्ति होगी, ऐसा कहना शास्त्रीय रूप से उचित नहीं।
धन के लिए जन्मकुंडली में द्वितीय और एकादश भाव सहित कर्म एवं भाग्य से संबंधित भावों का विचार आवश्यक है।
उपाय
उत्तर दिशा में अनावश्यक कबाड़ न रखें। प्राकृतिक प्रकाश और वायु का उचित प्रबंध करें।
🕉️ ईशान कोण — स्वच्छता और आध्यात्मिकता
उत्तर-पूर्व को ईशान कोण कहा जाता है। वास्तु परंपरा में इसे विशेष पवित्रता प्रदान की गई है।
इस क्षेत्र में अत्यधिक भारीपन, गंदगी और अनुपयोगी सामान रखना उचित नहीं माना जाता।
नियम
- ईशान को स्वच्छ रखें।
- वहाँ कबाड़ जमा न करें।
- पर्याप्त प्रकाश रखें।
- पूजा या ध्यान के लिए उपयुक्त स्थान हो तो उसका विचार करें।
प्रभाव
वास्तु परंपरा में ईशान की शुद्धता को मानसिक शांति और सात्त्विक वातावरण से जोड़ा जाता है।
🪨 नैऋत्य — स्थिरता का क्षेत्र
दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋत्य दिशा को वास्तु परंपरा में स्थिरता और भार से जोड़ा जाता है।
इसलिए इसे अत्यधिक खाली या अस्थिर रखने के बजाय भवन की योजना के अनुसार अपेक्षाकृत स्थायी उपयोग दिया जाता है।
उपाय
यहाँ अनावश्यक पानी का रिसाव न हो। भारी वस्तुओं की व्यवस्था भवन की संरचनात्मक आवश्यकता देखकर करें।
🌬️ वायव्य — गति और आवागमन
उत्तर-पश्चिम अर्थात वायव्य दिशा को वायु और गति से जोड़ा जाता है।
इसलिए इस क्षेत्र में वेंटिलेशन और उचित प्रकाश रखना उपयोगी है।
अतिथि-कक्ष या ऐसे स्थान जिनमें आवागमन अधिक हो, उनके लिए इस दिशा का विचार कुछ वास्तु परंपराओं में किया जाता है।
उपाय
वायव्य क्षेत्र में कबाड़ जमा न करें और वायु का उचित संचार रखें।
🪔 ब्रह्मस्थान — मध्य भाग
घर के मध्य भाग को अनेक वास्तु परंपराओं में ब्रह्मस्थान कहा जाता है।
इसे अत्यधिक भारी सामान से भरने के बजाय यथासंभव खुला और व्यवस्थित रखना परंपरागत सलाह है।
लेकिन केवल वास्तु के नाम पर मजबूत दीवार, बीम या स्तंभ हटाना उचित नहीं।
भवन की संरचनात्मक सुरक्षा सर्वोच्च है।
💧 पानी का रिसाव — वास्तविक आर्थिक नुकसान
वास्तु-उपायों में सबसे पहले वास्तविक समस्या को ठीक करना चाहिए।
यदि नल, पाइप या टंकी लगातार रिसती है तो—
- पानी की बर्बादी होती है,
- दीवारें खराब हो सकती हैं,
- सीलन उत्पन्न हो सकती है,
- मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है।
इसलिए पानी का रिसाव ठीक करना एक अत्यंत उपयोगी “धन-संरक्षण उपाय” है।
🍚 अन्न की रक्षा — समृद्धि का मूल संस्कार
भारतीय परंपरा में अन्न को अत्यंत सम्मान दिया गया है।
घर में अन्न की बर्बादी रोकना, अनाज को सुरक्षित रखना और रसोई को स्वच्छ रखना गृहस्थ समृद्धि का महत्वपूर्ण व्यवहारिक नियम है।
उपाय
पुराना या खराब भोजन अनावश्यक रूप से जमा न करें। आवश्यकतानुसार ही खरीदें और भोजन की बर्बादी रोकें।
🚪 मुख्य द्वार का महत्व
मुख्य द्वार घर का प्रमुख प्रवेश मार्ग है।
इसे साफ, सुरक्षित और व्यवस्थित रखना चाहिए।
नहीं करना चाहिए
- द्वार के सामने कूड़ा रखना,
- टूटे फर्नीचर का ढेर लगाना,
- रास्ता अवरुद्ध करना,
- दरवाजा खराब होने पर लंबे समय तक न ठीक करना।
प्रभाव
व्यावहारिक रूप से साफ और सुरक्षित प्रवेश घर के आराम और सुरक्षा को बढ़ाता है। वास्तु परंपरा इसे शुभ गृह-वातावरण का संकेत मानती है।
🪐 जन्मकुंडली में धन की कमी का ज्योतिषीय विचार
यदि आर्थिक कठिनाई हो तो ज्योतिषीय परंपरा में केवल एक ग्रह देखकर निर्णय नहीं किया जाता।
मुख्य रूप से—
द्वितीय भाव — धन और परिवार
एकादश भाव — लाभ और आय
दशम भाव — कर्म और व्यवसाय
नवम भाव — भाग्य
चतुर्थ भाव — गृह और सुख
का विचार किया जाता है।
इनके स्वामी, उनमें स्थित ग्रह, दृष्टि, नक्षत्र, दशा-अंतरदशा और गोचर आदि को समग्र रूप से देखा जाता है।
इसीलिए “धन नहीं है, इसलिए केवल शुक्र का उपाय करो” जैसी एक-पंक्ति वाली सलाह पर्याप्त नहीं मानी जानी चाहिए।
धन - समृद्धि के लिए वैदिक वास्तु शास्त्र के उपाय :
वैदिक वास्तु शास्त्र विद्या के अनुसार, घर का दक्षिण - पूर्व कोना धन का कोना होता है।
इस जगह की साफ - सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए।
इस कोने में मनी प्लांट या बैंबू-ट्री लगाना लाभकारी माना गया है।
मान्यता है कि इससे धन, सुख - समृद्धि आती है।
वैदिक वास्तु शास्त्र विद्या के अनुसार, घर के किसी कोने या कमरे में चीजों को बिखेर कर नहीं रखना चाहिए।
इससे घर की नेगेटिविटी बढ़ती है।
इसके अलावा धन रखने के स्थान जैसे तिजोरी या अलमारी की साफ - सफाई का भी खास ध्यान रखना चाहिए।
मान्यता है कि धन को साफ - सुथरे और व्यवस्थित स्थान पर रखने से आर्थिक स्थिरता आती है।
घर का उत्तर - पूर्व कोना कुबेर देवता को समर्पित माना जाता है।
मान्यता है कि घर के उत्तरी दीवार पर कुबेर यंत्र या दर्पण रखने से धन आगमन के नए स्त्रोत खुलते हैं।
इस दिशा में जूते - चप्पल, बाथरूम और भारी फर्नीचर नहीं होना चाहिए।
वैदिक वास्तु शास्त्र विद्या के अनुसार, घर का मुख्यद्वार धन, सुख-समृद्धि और पॉजिटिविटी को आकर्षित करता है।
इस लिए घर के मुख्यद्वार के साफ - सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए।
मुख्य दरवाजे पर पेड़ - पौधे और विंड चाइम्स लगाना चाहिए।
🌙 प्रश्नकुंडली से वर्तमान आर्थिक परिस्थिति
यदि प्रश्न हो—
“धन की कमी कब दूर होगी?”
तो प्रश्न ज्योतिष की परंपरा में प्रश्न के समय की कुंडली से संकेत लिए जाते हैं।
यदि प्रश्न हो—
“यह घर बदलना चाहिए या नहीं?”
तो प्रश्नकुंडली के साथ भवन की वास्तविक वास्तु स्थिति भी देखना उचित है।
प्रश्नकुंडली और वास्तु निरीक्षण दो अलग-अलग स्तर हैं।
⭐ गोचर और दशा का महत्व
जन्मकुंडली संभावनाओं का संकेत देती है, जबकि दशा-अंतरदशा और गोचर से समयगत परिस्थितियों का अध्ययन किया जाता है।
कभी व्यक्ति की कुंडली में धन अर्जित करने की क्षमता के संकेत होते हैं, लेकिन किसी विशेष समय में खर्च, ऋण या विलंब अधिक हो सकता है।
ऐसे समय में केवल वास्तु-परिवर्तन करने के बजाय आर्थिक अनुशासन और वास्तविक परिस्थितियों का भी सुधार आवश्यक है।
🌟 नक्षत्र-पद्धति और कृष्णमूर्ति पद्धति
नक्षत्र-पद्धति में ग्रह किस नक्षत्र में स्थित है, इसका विशेष महत्व माना जाता है।
कृष्णमूर्ति पद्धति में ग्रहों के नक्षत्र स्वामी और उप-स्वामी आदि के आधार पर घटनाओं का सूक्ष्म फलित किया जाता है।
यदि आर्थिक प्रश्न हो तो संबंधित भावों के संकेतों को देखकर समय और घटना की संभावना का अध्ययन किया जा सकता है।
लेकिन इन पद्धतियों से वास्तु के किसी कमरे का स्थान सीधे निर्धारित करना आवश्यक नहीं है।
🔢 अंकशास्त्र
अंकशास्त्र में जन्मांक, नामांक तथा अन्य संख्याओं का अध्ययन किया जाता है।
यदि घर की संख्या को लेकर प्रश्न हो तो उसका अंकशास्त्रीय अध्ययन किया जा सकता है।
लेकिन मकान संख्या को बदलने मात्र से आर्थिक स्थिति निश्चित रूप से बदल जाएगी—ऐसा दावा प्रमाणित सार्वभौमिक नियम नहीं है।
✋ हस्तरेखा और सामुद्रिकशास्त्र
हस्तरेखा में भाग्यरेखा, सूर्यरेखा, गुरु पर्वत, शुक्र पर्वत आदि का पारंपरिक अध्ययन होता है।
सामुद्रिकशास्त्र में शरीर के विभिन्न लक्षणों का संकेतात्मक अध्ययन किया जाता है।
इनसे व्यक्ति की कर्मप्रवृत्ति, स्वभाव और जीवन-संबंधी पारंपरिक संकेत लिए जा सकते हैं, लेकिन भवन के वास्तु का निर्णय केवल हाथ या शरीर देखकर नहीं किया जाना चाहिए।
🪔 सुख-शांति के धार्मिक उपाय
यदि परिवार धार्मिक आस्था रखता है तो घर में नियमित रूप से—
- दीप प्रज्वलित करना,
- इष्टदेव का स्मरण,
- मंत्र-जप,
- पूजा,
- दान,
- जरूरतमंद को भोजन,
- गौसेवा या अन्य सेवा,
- माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान
जैसे आचरण किए जा सकते हैं।
इनका उद्देश्य केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि मन और परिवार में सात्त्विकता तथा सद्भाव बढ़ाना है।
🌾 धन की कमी दूर करने के दस वास्तविक उपाय
१. आय-व्यय का लिखित हिसाब रखें।
२. अनावश्यक खर्च पहचानकर कम करें।
३. उच्च ब्याज वाले ऋण से सावधान रहें।
४. घर में पानी और बिजली की बर्बादी रोकें।
५. रसोई में भोजन की बर्बादी रोकें।
६. घर में अनुपयोगी सामान जमा न करें।
७. व्यवसाय या नौकरी में वास्तविक कमियों की पहचान करें।
८. नियमित बचत की आदत रखें।
९. धार्मिक उपायों के साथ कर्म और परिश्रम रखें।
१०. वास्तु में बड़े परिवर्तन से पहले योग्य विशेषज्ञ से भवन का निरीक्षण करवाएँ।
🌺 घर में धन और सुख-शांति का समन्वित सूत्र
घर में सुख-समृद्धि के लिए केवल वास्तु को जिम्मेदार मानना उचित नहीं।
यदि—
घर का वास्तु संतुलित हो,
प्राकृतिक प्रकाश और वायु हो,
जल की बर्बादी न हो,
रसोई स्वच्छ हो,
अन्न सुरक्षित हो,
घर में धार्मिक और शांत वातावरण हो,
आय का उचित साधन हो,
खर्च नियंत्रित हो,
ऋण विवेकपूर्वक लिया जाए,
और परिवार के सदस्य परिश्रम एवं सदाचार से जीवन चलाएँ,
तो आर्थिक स्थिरता के लिए मजबूत आधार तैयार होता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से जन्मकुंडली संभावनाओं और समय का संकेत दे सकती है; वास्तु भवन की व्यवस्था को सुधारने की दिशा दिखा सकता है; धार्मिक उपाय मन में श्रद्धा और अनुशासन उत्पन्न कर सकते हैं।
🙏 अंतिम निष्कर्ष
धन की कमी दूर करने का वास्तुशास्त्रीय अर्थ यह नहीं कि कोई एक वस्तु किसी एक दिशा में रख देने से धन अपने-आप आने लगेगा।
वास्तु का अधिक संतुलित और शास्त्रीय अर्थ है—
“दिशाओं का संतुलन, पंचतत्त्वों का उचित उपयोग, स्वच्छता, प्रकाश, वायु, जल और अग्नि की उचित व्यवस्था तथा गृह में सात्त्विक वातावरण।”
इसके साथ ज्योतिषीय दृष्टि से—
द्वितीय भाव धन का,
एकादश भाव लाभ का,
दशम भाव कर्म का,
नवम भाव भाग्य का,
चतुर्थ भाव गृह-सुख का
विचार किया जा सकता है।
दशा, अंतरदशा, गोचर और नक्षत्र समयगत संकेत देते हैं। प्रश्नकुंडली तत्काल प्रश्न का अध्ययन करती है। कृष्णमूर्ति पद्धति घटनाओं के सूक्ष्म समय-निर्धारण की अपनी प्रणाली देती है। अंकशास्त्र, हस्तरेखा और सामुद्रिकशास्त्र अपनी-अपनी पारंपरिक पद्धतियों में सहायक संकेत देते हैं।
अतः घर में सुख-शांति और धन की स्थिरता के लिए सबसे सुंदर सूत्र है—
“वास्तु में संतुलन,
गृह में स्वच्छता,
रसोई में अन्न का सम्मान,
जल में संयम,
अग्नि में सुरक्षा,
वायु में प्रवाह,
मन में श्रद्धा,
कर्म में परिश्रम
और धन में अनुशासन।”
यही वह मार्ग है जिसमें वास्तु-परंपरा, ज्योतिषीय विचार, धार्मिक आचार और व्यावहारिक जीवन—चारों एक-दूसरे के पूरक बनकर गृहस्थ जीवन को अधिक व्यवस्थित और सुखमय बनाने में सहायता कर सकते हैं।
॥ श्री वास्तुपुरुषाय नमः ॥ ॥ श्री महालक्ष्म्यै नमः ॥ ॥ श्री अन्नपूर्णायै नमः ॥ ॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः ॥ पंडारामा प्रभु राज्यगुरु तमिल / द्रावीण ब्राह्मण !!!! शुभमस्तु !!!
🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏
पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
" Opp. Shri Ramanatha Swami Kovil Car Parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits, V.O.C. Nagar , RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
सेल नंबर: . + 91- 7010668409 / + 91- 7598240825 ( तमिलनाडु )
Skype : astrologer85 Web: Sarswatijyotish.com
Email: prabhurajyguru@gmail.com
आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद..
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

No comments:
Post a Comment