ये गलतियां भूलकर भी न करे, वरना हो सकता आर्थिक नुकसान!
घर में सुख-समृद्धि के लिए वास्तु की वे गलतियाँ जो नहीं करनी चाहिए !
यदि आप अपने घर में वास्तु से संबंधित कुछ गलतियां कर रहे हैं, तो यह आपको गंभीर समस्याओं में डाल सकता है।
जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, गोचर, नक्षत्र, ज्योतिष एवं वास्तु परंपरा के समन्वित नियम, प्रभाव, फल और उपाय !
इस से आप कर्ज में फंस सकते हैं और घर में दरिद्रता आ सकती है।
इस लिए, आपको तुरंत नीचे दिए गए वास्तु उपायों को अपनाना चाहिए।
सनातन भारतीय परंपरा में गृह को केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि परिवार के सुख, स्वास्थ्य, अन्न, धन, संतान, संस्कार और मानसिक शांति का आधार माना गया है। इसी कारण वास्तुशास्त्र में भवन की दिशा, भूमि, द्वार, जल, अग्नि, वायु, आकाश, भार-वितरण और उपयोगिता पर विशेष विचार किया जाता है।
यदि आप उन लोगों में से हैं जो जीवन में पैसे कमाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।
लेकिन इसके बावजूद भी आपको सफलता नहीं मिल रही है।
तो यह संभव है कि कुछ वास्तु संबंधी गलतियां इसके पीछे का कारण हों।
आइए, हम आपको कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बताते हैं।
यदि आप अनजाने में इनमें से कोई कर रहे हैं।
तो आपको इन्हें तुरंत छोड़ देना चाहिए।
यदि आप अपने घर में वास्तु से संबंधित कुछ गलतियां कर रहे हैं, तो यह आपको गंभीर समस्याओं में डाल सकता है।
इससे आप कर्ज में फंस सकते हैं और घर में दरिद्रता आ सकती है।
इस लिए, आपको तुरंत नीचे दिए गए वास्तु उपायों को अपनाना चाहिए।
यदि आपके घर के मुख्य द्वार पर अंधेरा रहता है, तो यह बहुत अशुभ माना जाता है।
जान लें कि मुख्य द्वार पर अंधेरा होने से आपके बनते काम बिगड़ सकते हैं।
और इस कारण आप मेहनत करने के बावजूद कई कार्यों में सफल नहीं हो पाते हैं।
आपने सुना होगा कि घर में टूटी हुई तस्वीरें नहीं रखनी चाहिए।
क्योंकि इससे पारिवारिक रिश्तों में तनाव उत्पन्न होता है और विवाद की संभावना बढ़ जाती है।
इस लिए, यदि आपके घर में टूटी हुई तस्वीरें हैं, तो उन्हें तुरंत हटा दें।
यदि आप अपने कपड़े, चप्पल-जूते आदि को घर में बेतरतीब तरीके से फेंक देते हैं, तो यह गलत है।
ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं, जिससे आपके घर में धन की कमी हो सकती है।
घर में कभी भी दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह खुली न रखें।
ऐसा करने से घर में मनमुटाव और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सकता है।
कई लोगों की आदत होती है।
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या अर्थात नक्षत्र-पद्धति, श्री कृष्णमूर्ति पद्धति, अंकशास्त्र, हस्तरेखाशास्त्र, सामुद्रिकशास्त्र और वास्तुशास्त्र की परंपराओं में अपने-अपने नियम हैं। इन सभी को एक-दूसरे का पूर्ण विकल्प न मानकर, अपने-अपने क्षेत्र में सहायक संकेतों के रूप में समझना चाहिए।
कि वे नल को खुला छोड़ देते हैं और पानी बहने देते हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह अशुभ माना जाता है और इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
धन-समृद्धि के प्रश्न में जन्मकुंडली में द्वितीय भाव, एकादश भाव, चतुर्थ भाव, नवम भाव और दशम भाव का विचार किया जाता है। इनके स्वामी, स्थित ग्रह, दृष्टि, नक्षत्र, दशा-अंतरदशा तथा वर्तमान गोचर से आर्थिक परिस्थिति के ज्योतिषीय संकेत देखे जाते हैं। वहीं वास्तु में भवन की वास्तविक दिशा और संरचना को प्राथमिकता दी जाती है।
इस के अलावा, यह मानसिक कमजोरी का कारण भी बन सकता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, रात के समय परफ्यूम जैसी तेज सुगंधित चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
क्योंकि यह आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकती है।
घर में किसी भी टूटे हुए शीशे, कांच या अन्य टूटी हुई वस्तुओं को रखना भी उचित नहीं है।
क्योंकि इससे सकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
कुछ लोग बंद घड़ी को घर में लटकाए रखते हैं।
जो वास्तु शास्त्र के अनुसार बहुत अशुभ है और इससे आर्थिक नुकसान हो सकता है।
यदि आप बिस्तर पर बैठकर खाना खाते हैं, तो यह भी गलत है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, इससे मां लक्ष्मी और मां अन्नपूर्णा नाराज हो जाती हैं, जिससे आपके घर की आर्थिक प्रगति रुक सकती है।
यदि आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, तो इसका एक कारण यह हो सकता है कि आप शाम के बाद दूध, दही और नमक जैसी वस्तुओं का दान करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि संध्या के समय इन चीजों का दान करने से आर्थिक दृष्टि से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
🌸 पहली बड़ी गलती — घर में कबाड़ जमा करते रहना
वास्तु परंपरा में स्वच्छता और सुव्यवस्था को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे सामान को लगातार घर में रखना जो वर्षों से उपयोग में नहीं आता, घर के उपयोगी स्थान को रोकता है और अव्यवस्था उत्पन्न करता है।
विशेष रूप से मुख्य प्रवेश, उत्तर-पूर्व, घर का मध्य भाग और रास्तों को कबाड़ से बंद करना उचित नहीं माना जाता।
प्रभाव
वास्तु-परंपरा के अनुसार इससे घर का वातावरण भारी और अव्यवस्थित माना जाता है। आर्थिक दृष्टि से भी इसका सीधा नुकसान हो सकता है, क्योंकि अनुपयोगी वस्तुएँ स्थान घेरती हैं और कई बार उनके रखरखाव पर अनावश्यक खर्च होता है।
उपाय
अनुपयोगी वस्तुओं को अलग करें। जो वस्तु उपयोग योग्य है उसे व्यवस्थित रखें और जो पूरी तरह अनुपयोगी है उसे घर से हटाएँ।
---
💧 दूसरी गलती — पानी का रिसाव ठीक न करवाना
घर में नल, पाइप, टंकी या छत से पानी लगातार टपकता रहे और उसे लंबे समय तक ठीक न करवाया जाए तो इसे वास्तु-दृष्टि से भी अच्छा नहीं माना जाता।
यहाँ वास्तु मान्यता के साथ व्यावहारिक अर्थ भी स्पष्ट है—पानी की बर्बादी सीधे खर्च बढ़ाती है और भवन को नुकसान पहुँचा सकती है।
प्रभाव
लगातार रिसाव से दीवारें खराब हो सकती हैं, सीलन बढ़ सकती है और मरम्मत का खर्च उत्पन्न हो सकता है।
उपाय
पानी का रिसाव तुरंत ठीक करवाएँ। पानी की टंकी, पाइप और नालियों की समय-समय पर जाँच करें।
---
🔥 तीसरी गलती — अग्नि और जल को बिना व्यवस्था के मिलाना
वास्तु परंपरा में दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्नि तत्व से संबंधित माना जाता है। रसोई में चूल्हा और जल-स्रोत का उचित अंतर रखना भी प्रचलित वास्तु सिद्धांत है।
चूल्हे के बिल्कुल पास सिंक, अत्यधिक जल या अव्यवस्थित उपकरण रखना वास्तु-दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।
प्रभाव
परंपरागत वास्तु में अग्नि और जल के असंतुलन को गृहस्थ जीवन में तनाव और अस्थिरता से जोड़ा जाता है।
व्यावहारिक रूप से भी गैस, पानी और विद्युत उपकरणों को असुरक्षित ढंग से पास-पास रखना दुर्घटना का कारण बन सकता है।
उपाय
रसोई को स्वच्छ और व्यवस्थित रखें। गैस चूल्हे और सिंक के बीच उचित दूरी रखें तथा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
---
🚪 चौथी गलती — मुख्य द्वार को गंदा और अवरोधयुक्त रखना
मुख्य द्वार गृह में प्रवेश का प्रमुख मार्ग है। वास्तु परंपरा में इसे अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
दरवाजे के सामने कूड़ा, टूटी वस्तुएँ, जूते-चप्पलों का अत्यधिक ढेर या ऐसा सामान जिससे रास्ता रुकता हो, रखना उचित नहीं माना जाता।
प्रभाव
वास्तु मान्यता के अनुसार प्रवेश क्षेत्र की अव्यवस्था गृह के सकारात्मक वातावरण को प्रभावित कर सकती है।
व्यावहारिक रूप से भी साफ और खुला प्रवेश घर को सुरक्षित, सुंदर और सुविधाजनक बनाता है।
उपाय
मुख्य द्वार को साफ रखें। दरवाजा ठीक प्रकार से खुलता-बंद होता हो, प्रकाश पर्याप्त हो और रास्ता बाधारहित हो।
---
🌞 पाँचवीं गलती — पूर्व दिशा को पूरी तरह अंधकारमय कर देना
सूर्य के प्रकाश का घर में प्रवेश स्वास्थ्य और वातावरण दोनों के लिए उपयोगी है। वास्तु परंपरा में पूर्व दिशा को सूर्य और प्रकाश से विशेष रूप से जोड़ा गया है।
पूर्व दिशा में अत्यधिक भारी सामान, स्थायी अवरोध या ऐसी संरचना जिससे प्राकृतिक प्रकाश रुक जाए, उचित नहीं माना जाता।
उपाय
जहाँ संभव हो, सुबह का प्राकृतिक प्रकाश घर में आने दें। खिड़कियाँ साफ रखें और अनावश्यक अवरोध हटाएँ।
---
⭐ छठी गलती — ईशान कोण में भारीपन और गंदगी
उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान दिशा को वास्तु परंपरा में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे हल्का, स्वच्छ और प्रकाशयुक्त रखने की परंपरा है।
यहाँ अनावश्यक भारी भंडारण, कबाड़ और गंदगी जमा करना वास्तु की दृष्टि से प्रतिकूल माना जाता है।
प्रभाव
परंपरागत वास्तु मत में इससे मानसिक शांति, धार्मिक वातावरण और समृद्धि के प्रवाह में बाधा मानी जाती है।
उपाय
ईशान क्षेत्र को साफ रखें। प्राकृतिक प्रकाश और वायु का उचित प्रवेश रखें। पूजा या ध्यान का स्थान बनाना हो तो उपलब्ध स्थान और भवन की वास्तविक संरचना देखकर निर्णय करें।
---
🪐 सातवीं गलती — केवल वास्तु को दोष देकर कर्म और आर्थिक अनुशासन भूल जाना
यह सबसे महत्वपूर्ण गलती है।
यदि जन्मकुंडली में आर्थिक स्थिति का अध्ययन किया जाए तो केवल वास्तु देखकर निर्णय नहीं किया जा सकता। द्वितीय और एकादश भाव के साथ दशम भाव, नवम भाव, चतुर्थ भाव, उनके स्वामी, ग्रहों की स्थिति तथा दशा-गोचर आदि का विचार आवश्यक माना जाता है।
यदि व्यक्ति की आय कम है लेकिन खर्च बहुत अधिक है, ऋण लगातार बढ़ रहा है और बचत नहीं है, तो केवल वास्तु-दोष बताकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।
उपाय
आय-व्यय का हिसाब रखें, अनावश्यक ऋण से बचें, बचत की आदत रखें और व्यवसाय में वास्तविक कमियों को सुधारें।
---
🪔 आठवीं गलती — टूटे हुए देवी-देवताओं के चित्र या पूजन सामग्री को वर्षों तक रखना
धार्मिक परंपरा में पूजा-सामग्री को श्रद्धा और स्वच्छता के साथ रखने पर बल दिया जाता है।
टूटी हुई मूर्तियाँ, फटे हुए धार्मिक चित्र या अनुपयोगी पूजा सामग्री को पूजा स्थान में अव्यवस्थित ढंग से रखना उचित नहीं माना जाता।
उपाय
ऐसी सामग्री के विसर्जन या सम्मानपूर्वक निस्तारण के लिए अपनी स्थानीय धार्मिक परंपरा का पालन करें और पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
---
🌿 नौवीं गलती — घर के मध्य भाग को अनावश्यक रूप से भारी करना
वास्तु परंपरा में भवन के मध्य भाग को विशेष महत्व दिया जाता है। इसे कई वास्तु परंपराओं में ब्रह्मस्थान कहा जाता है।
इस स्थान को अत्यधिक भारी संरचना, कबाड़ या अनुपयोगी सामान से भर देना वास्तु-दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।
उपाय
जहाँ भवन की वास्तविक संरचना अनुमति दे, वहाँ मध्य भाग को अपेक्षाकृत खुला और व्यवस्थित रखें। लेकिन केवल वास्तु के नाम पर किसी मजबूत संरचनात्मक दीवार को तोड़ना उचित नहीं है।
---
🌙 दसवीं गलती — बिना जन्मकुंडली देखे हर व्यक्ति को एक ही ग्रह का उपाय बताना
ज्योतिषीय परंपरा में प्रत्येक व्यक्ति की जन्मकुंडली अलग होती है। इसलिए एक व्यक्ति के लिए शुभ मानी जाने वाली ग्रह-उपासना दूसरे व्यक्ति के लिए उसी प्रकार लागू हो, यह आवश्यक नहीं।
विशेषकर रत्न धारण करने के विषय में जन्मकुंडली, लग्न, ग्रहबल, भावाधिपत्य और दशा आदि का विचार करना चाहिए।
उपाय
रत्न या विशेष ग्रह-उपाय बिना उचित ज्योतिषीय परीक्षण के न करें। सामान्य धार्मिक उपाय, जैसे प्रार्थना, दान, सेवा और सदाचार, अपनी श्रद्धा के अनुसार किए जा सकते हैं।
🔢 ग्यारहवीं गलती — केवल मकान नंबर देखकर आर्थिक भविष्य तय करना
अंकशास्त्र में मकान संख्या का विचार कुछ परंपराओं में किया जाता है। लेकिन केवल मकान का अंक देखकर यह निश्चित कर देना कि घर धनवान बनाएगा या आर्थिक नुकसान देगा, उचित नहीं है।
भवन की वास्तविक दिशा, निर्माण, उपयोग, व्यक्ति की जन्मकुंडली और आर्थिक परिस्थितियाँ अलग-अलग विषय हैं।
इसलिए अंकशास्त्र को सहायक पद्धति की तरह देखना अधिक उचित है।
---
✋ बारहवीं गलती — हस्तरेखा या सामुद्रिक संकेत को अंतिम निर्णय मान लेना
हस्तरेखा में भाग्यरेखा, सूर्यरेखा, गुरु पर्वत, शुक्र पर्वत आदि के अध्ययन की परंपरा है। सामुद्रिकशास्त्र में शरीर के विभिन्न लक्षणों से व्यक्ति के स्वभाव और जीवन के संकेतों का अध्ययन किया जाता है।
लेकिन किसी एक रेखा या शारीरिक लक्षण के आधार पर यह कहना कि “अब निश्चित रूप से धन आएगा” या “अब निश्चित आर्थिक नुकसान होगा”, अत्यधिक निश्चित दावा होगा।
इन्हें संकेतात्मक परंपरा के रूप में समझना चाहिए।
---
📜 शास्त्रों के नाम पर एक और बड़ी गलती
ऋग्वेद, पुराण, भविष्यपुराण, भृगु संहिता, गर्ग संहिता आदि का नाम लेकर ऐसा प्रत्येक आधुनिक वास्तु-नियम सीधे उन्हीं ग्रंथों में लिखा हुआ बताना उचित नहीं है।
शास्त्रीय परंपरा में अनेक सिद्धांत अलग-अलग ग्रंथों, वास्तु-परंपराओं और बाद के आचार्यों के माध्यम से विकसित हुए हैं।
इसलिए किसी नियम को प्रस्तुत करते समय यह स्पष्ट करना अधिक शास्त्रोचित है कि वह—
वैदिक सिद्धांत है, वास्तु-परंपरा है, ज्योतिषीय मत है, अथवा आधुनिक व्यावहारिक उपाय है।
इससे शास्त्र के प्रति श्रद्धा भी बनी रहती है और अतिशयोक्ति से भी बचा जा सकता है।
---
🕉️ जन्मकुंडली + वास्तु + गोचर का समन्वित उदाहरण
मान लीजिए किसी गृहस्थ के जीवन में लगातार आर्थिक अस्थिरता दिखाई देती है। ऐसी स्थिति में पारंपरिक ज्योतिषी पहले जन्मकुंडली में धन और लाभ से संबंधित भावों तथा ग्रहों का अध्ययन करेगा।
फिर वर्तमान दशा और गोचर देखकर यह देखा जाएगा कि आर्थिक परिस्थिति का समय कैसा चल रहा है।
इसके बाद भवन का वास्तविक वास्तु देखा जाएगा—
मुख्य द्वार कहाँ है?
उत्तर और पूर्व की स्थिति कैसी है?
ईशान क्षेत्र कैसा है?
रसोई कहाँ है?
जल का स्थान कहाँ है?
घर का मध्य भाग कैसा है?
दक्षिण-पश्चिम में अनावश्यक हल्कापन तो नहीं?
कहीं पानी का रिसाव तो नहीं?
कहीं कबाड़ और अव्यवस्था तो नहीं?
यदि वास्तु में कोई व्यावहारिक कमी दिखाई देती है तो उसे सुधारा जाएगा। यदि ज्योतिषीय दृष्टि से किसी धार्मिक उपाय की परंपरा उपयुक्त हो तो वह श्रद्धा से किया जा सकता है।
इस प्रकार वास्तु को भय का साधन नहीं बल्कि सुधार का साधन बनाया जाता है।
🌾 धन-धान्य की रक्षा के दस सरल नियम
घर में सुख-समृद्धि के लिए—
1. घर स्वच्छ और व्यवस्थित रखें।
2. मुख्य द्वार को अवरोधमुक्त रखें।
3. पानी का रिसाव तुरंत ठीक करें।
4. रसोई को स्वच्छ और सुरक्षित रखें।
5. प्राकृतिक प्रकाश और वायु का उचित प्रवेश रखें।
6. ईशान क्षेत्र को अनावश्यक भारी सामान से न भरें।
7. घर के मध्य भाग में अनावश्यक कबाड़ न रखें।
8. अन्न का अपमान या अनावश्यक बर्बादी न करें।
9. आय से अधिक खर्च और अनियंत्रित ऋण से बचें।
10. वास्तु-उपाय के साथ कर्म, सदाचार, दान, सेवा और आर्थिक अनुशासन रखें।
🌺 अंतिम संदेश
वास्तुशास्त्र का उद्देश्य मनुष्य को भयभीत करना नहीं है। “यह वस्तु यहाँ रखी तो धन चला जाएगा” जैसी अत्यधिक निश्चित धारणाओं के बजाय भवन की वास्तविक संरचना, दिशा, प्रकाश, वायु, जल, अग्नि, स्वच्छता और उपयोगिता का संतुलन अधिक महत्वपूर्ण है।
जन्मकुंडली व्यक्ति की ज्योतिषीय प्रवृत्तियों का संकेत देती है। प्रश्नकुंडली किसी विशेष प्रश्न के समय का संकेत देती है। गोचर वर्तमान समय का अध्ययन करता है। नक्षत्र-पद्धति समय के सूक्ष्म विचार में सहायक हो सकती है। अंकशास्त्र, हस्तरेखा और सामुद्रिकशास्त्र अपनी-अपनी परंपराओं में संकेत देते हैं। वास्तु भवन की स्थानिक व्यवस्था का अध्ययन करता है।
अतः घर में सुख-समृद्धि के लिए सबसे बड़ा सूत्र यही है—
“वास्तु में संतुलन, जीवन में अनुशासन, धन में संयम, कर्म में परिश्रम, व्यवहार में सदाचार और मन में ईश्वर के प्रति श्रद्धा।”
जहाँ अन्न की कद्र होती है, जल की रक्षा होती है, अग्नि का सम्मान होता है, घर स्वच्छ रहता है, माता-पिता और अतिथियों का सम्मान होता है, परिश्रम किया जाता है और धन का विवेकपूर्ण उपयोग होता है—वहाँ सुख-समृद्धि की वास्तविक नींव मजबूत होती है।
॥ श्री वास्तुपुरुषाय नमः ॥ ॥ श्री महालक्ष्म्यै नमः ॥ ॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः ॥ !!!!! शुभमस्तु !!!
🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏
पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
" Opp. Shri Ramanatha Swami Kovil Car Parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits, V.O.C. Nagar , RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
सेल नंबर: . + 91- 7010668409 / + 91- 7598240825 ( तमिलनाडु )
Skype : astrologer85 Web: Sarswatijyotish.com
Email: prabhurajyguru@gmail.com
आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद..
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

No comments:
Post a Comment